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| لقمه و نكـــــــتهست كامل را حـلال | |
| تو نهاي كـــــــامل مخور ميباش لال | |
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| چون تو گوشي او زبان ني جنس تو |
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گوشـها را حـــق بفرمود انــــصتــــوا | |
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| كودك اول چـون بـزايد شيــــــــرنوش | |
| مـدتي خامــــش بـود او جمله گوش | |
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| مدتـــــي ميبايدش لــــــب دوختـن | |
| از ســـــخن تا او سخــــــن آموختـن | |
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| ور نباشد گــــــوش و تيتي ميكند | |
| خويشتن را گــــــــنگ گيتي ميكند | |
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| كـــــــــر اصلي كش نبد ز آغاز گوش | |
| لال باشد كي كند در نطـــــق جوش | |
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| زانك اول ســـــــــــــــمع بايد نطق را | |
| سوي منـــــــــطق از ره سمع اندر آ | |
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| وادخلوا الابيــــــــات من ابـــــــــوابها | |
| واطـــــــــــلبوا الاغراض في اسبابها | |
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| نطق كان موقوف راه ســـمع نيست | |
| جز كه نطـــق خالق بيطمع نيست | |
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| مبــــــدعست او تـــــــابع استاد ني | |
| مســـــند جمله ورا اســـــــــناد ني | |
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| باقــــــيان هم در حرف هم در مقال | |
| تابع استـــــاد و محـــــتاج مثــــــــال | |
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| زين ســـــــخن گر نيستي بيگانهاي | |
| دلق و اشــــكي گـــــير در ويرانهاي | |
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| زانك آدم زان عــــتاب از اشك رست | |
| اشـــــــك تر باشد دم تـــــوبهپرست | |
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| بهــــــر گريه آمد آدم بر زمـــــــــــين | |
| تا بود گــــــــــــــريان و نالان و حزين | |
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| آدم از فـــــــــردوس و از بالاي هفت | |
| پاي مـــاچان از براي عـــــــــرر رفت | |
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| گر ز پشـــــــت آدمي وز صـــــلب او | |
| در طلــــــب ميباش هم در طلب او | |
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| ز آتــــــــــش دل و آب ديده نقل ساز | |
| بوستــــــان از ابر و خورشيدست باز | |
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| تو چـــــــــه داني ذوق آب ديـــــدگان | |
| عاشـــــق ناني تـــــــو چون ناديدگان | |
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| گر تو اين انــــــــبان ز نان خالي كني | |
| پر ز گـــــوهرهــــاي اجــــــلالي كني | |
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| طفل جان از شـــــــير شيطان باز كن | |
| بعــــــــــد از آنش با ملك انـــــــباز كن | |
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| تا تو تاريـــــــــك و مـــــلول و تيـــرهاي | |
| دان كه با ديــــو لعــــــين همشيرهاي | |
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| لقمهاي كــــــــو نور افـــــــزود و كمال | |
| آن بود آورده از كــــــــسب حـــــــــلال | |
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| روغني كايــــــــد چــــــــــراغ ما كشد | |
| آب خوانــــــــش چون چراغي را كشد | |
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| علــــــــم و حكمت زايد از لقمهء حلال | |
| عشق و رقت آيد از لقــــــــــمهء حلال | |
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| چون ز لقمه تو حســـــــــد بيني و دام | |
| جـــــهل و غفلت زايـــد آن را دان حرام | |
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| هيــــــــچ گندم كاري و جــــــــو بر دهد | |
| ديدهاي اســـپي كه كـــره خـــــــر دهد | |
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| لقمه تخــــــمست و برش انديـــــشهها | |
| لقمه بحــــر و گوهرش انــــــــــديشهها | |
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| زايد از لـــــــقمهء حلال اندر دهــــــــــان | |
| ميل خـــــــدمت عزم رفتــــــن آن جهان | |