| گفت اي ناصح خمش كن چند چند | |
| پند كم ده زانك بس سختست بند | |
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| سختتر شد بند من از پند تو | |
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| آن طرف كه عشق ميافزود درد | |
| بوحنيفه و شافعي درسي نكرد | |
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| تو مكن تهديد از كشتن كه من | |
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| عاشقان را هر زماني مردنيست | |
| مردن عشاق خود يك نوع نيست | |
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| او دو صد جان دارد از جان هدي | |
| وآن دوصد را ميكند هر دم فدي | |
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| هر يكي جان را ستاند ده بها | |
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| گر بريزد خون من آن دوسترو | |
| پايكوبان جان برافشانم برو | |
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| چون رهم زين زندگي پايندگيست | |
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| يا منير الخد يا روح البقا | |
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| پارسي گو گرچه تازي خوشترست | |
| عشق را خود صد زبان ديگرست | |
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| بوي آن دلبر چو پران ميشود | |
| آن زبانها جمله حيران ميشود | |
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| بس كنم دلبر در آمد در خطاب | |
| گوش شو والله اعلم بالصواب | |
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| چونك عاشق توبه كرد اكنون بترس | |
| كو چو عياران كند بر دار درس | |
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| گرچه اين عاشق بخارا ميرود | |
| نه به درس و نه به استا ميرود | |
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| عاشقان را شد مدرس حسن دوست | |
| دفتر و درس و سبقشان روي اوست | |
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| ميرود تا عرش و تخت يارشان | |
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| درسشان آشوب و چرخ و زلزله | |
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| سلسلهء اين قوم جعد مشكبار | |
| مسئلهء دورست ليكن دور يار | |
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| مسئلهء كيس ار بپرسد كس ترا | |
| گو نگنجد گنج حق در كيسهها | |
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| چشم بر خورشيد بينش ميگماشت | |
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| هركه درخلوت ببينش يافت راه | |
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| با جمال جان چوشد همكاسهاي | |
| باشدش ز اخبار و دانش تاسهاي | |
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| زان همي دنيا بچربد عامه را | |
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| زانك دنيا را هميبينند عين | |
| وآن جهاني را هميدانند دين | |
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